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04 September, 2015

क्रोध सोमवार को आऐ तो बोलना सप्ताह की शुरूवात है आज नहीं करूगा ।
मंगल को आऐ तो बोलना मंगल में क्यों अमंगल कर रहा है।
बुध तो शुद्ध है इसे अशुद्ध मत कर।
गूरू को आऐ तो बोलना आज तो गुरू का दिन है, मन में शान्ति रखना है ।
शुक्र को तो शुक्रीया करना भगवान का ।
शनी को घर में शनीछर क्यों लाऐ  और रवी को तो छुट्टी का दिन है। क्रोध तेरा क्या काम है?

23 August, 2015

हर मुश्किल राँह मे जब आसान सफर लगता है
मुझे तो सिर्फ़ तेरी रहमतों का असर लगता है

ये दिल वीरान था एक सहरा बना हुआ
पर तेरी तस्वीर बैठा लूँ तो खाली दिल भी इक घर लगता है

तेरी मुस्कुराहट आँखों के सामने जब याद आती है
तो आसमाँ से भी ऊँचा मेरा सर लगता है

ज़माने के हर मोड़ पर फक़त ग़म है मिलते
तेरे आँचल मे सिमट जाँऊ तो प्यार का नगर लगता है

तेरा जलवा , तेरी सूरत हर तरफ है मौजूद
मुझे तो ये खुदा के दिवानों का शहर लगता है

ज्ञान का दीप जब से हैं मन मे जला
मेरी नज़रों में खुदा अब हर ब़शर लगता है

भूलकर भी दूर तुझसे हो ना जाँऊ दातार
क्योंकि हकीक़त का आईना मुझे ये तेरा दर लगता है.

हर मुश्किल राँह मे जब आसान सफर लगता है
मुझे तो सिर्फ़ तेरी रहमतों का असर लगता है

ये दिल वीरान था एक सहरा बना हुआ
पर तेरी तस्वीर बैठा लूँ तो खाली दिल भी इक घर लगता है

तेरी मुस्कुराहट आँखों के सामने जब याद आती है
तो आसमाँ से भी ऊँचा मेरा सर लगता है

ज़माने के हर मोड़ पर फक़त ग़म है मिलते
तेरे आँचल मे सिमट जाँऊ तो प्यार का नगर लगता है

तेरा जलवा , तेरी सूरत हर तरफ है मौजूद
मुझे तो ये खुदा के दिवानों का शहर लगता है

ज्ञान का दीप जब से हैं मन मे जला
मेरी नज़रों में खुदा अब हर ब़शर लगता है

भूलकर भी दूर तुझसे हो ना जाँऊ दातार
क्योंकि हकीक़त का आईना मुझे ये तेरा दर लगता है.

20 August, 2015

बुलंदी मिल नही सकती उन्हे जो फक्र
करते है,
बुलंदी है उसीकी जो खुदा का शुक्र
करते है।
"खुद"में "खुदा को" देखना "ध्यान" है
"दूसरों" में "खुदा को" देखना"प्रेम" है
खुदा को सबमें और सबमें खुदा को
देखना ज्ञान है......

संत समागम दुरलभ

तात मिले,पुनि मात मिले,सुत भरात मिले युवती सुखदाई ,  राज मिेले,गज बाज मिले,सब साज मिले,मनवांछित फल पाई , लोक मिलें,सुर लोक मिलें,विधि लोक मिलें बैकुंठ को जाई, सुंदर और मिलैं सबही,पर संत समागम दुरलभ भाई.

23 July, 2015

काबिल तो नही
ये मुझको भी पता और तुझको भी

फिर भी
तेरे बंदे मुझे तेरा संत कह देते है।

""एक फूल भी अक्सर बाग सजा देता हैँ,
एक सितारा  संसार चमका देता हैँ,
जहाँ दुनिया भर के रिश्ते काम नही आते,
वहाँ मेरा सदगुरु जिन्दगी बना देता हैँ!

21 July, 2015

एक ही विषय पर 5 महान शायरों का नजरिया....
.
1- Mirza Ghalib :
"शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।"
.
2- Iqbal
"मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह नहीं ,
काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।"
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3- Ahmad Faraz
"काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर, खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं।"
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4- Wasi
"खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं।"
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5- Saqi
"पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
जन्नत में कौन सा ग़म है इसलिए वहाँ पीने में मजा नही।"

Teacher vs Guru

A Teacher instructs you, a Guru constructs you. A Teacher sharpens your mind, a Guru opens your mind. A Teacher answers your question, a Gur...