जब ये दोनों बढतें हैं..
तब “इन्सान” चाह कर भी
किसी को गले नहीं लगा सकता..
हज़ारों लीटर दूध को बर्बाद कर देती है…
…उसी प्रकार…
“मनुष्य का अहंकार”
भी अच्छे से अच्छे संबंधों को
बर्बाद कर देता है!!!
प्रभु का रास्ता बड़ा सीधा है,
और बड़ा उलझा भी,!!
बुद्धि से चलो तो बहुत उलझा,
भक्ति से चलो तो बड़ा सीधा,
विचार से चलो तो बहुत दूर,
भाव से चलो तो बहुत पास
नजरो से देखो तो कण कण मे,
और अंतर्मन से देखो तो जन जन में"
नदी का पानी मीठा होता है क्योंकि वो पानी देती रहती है।
सागर का पानी खारा होता है क्योंकि वो हमेशा लेता रहता है।
नाले का पानी हमेशा दुर्गंध देता है क्योंकि वो रूका हुआ होता है।
यही जिंदगी है
देते रहोगे तो सबको मीठे लगोगे।
लेते रहोगे तो खारे लगोगे।और
अगर रुक गये तो सबको बेकार लगोगे।
निष्कर्ष : सत्कर्म ही जीवन है।
"जो सफर की शुरुआत 'सत्संग' से करते हैं।
"सतगुरु" उनके जीवन में 'खुशियों' के रंग भरते हैं।
जो सफर की शुरुवात 'सेवा' से करते हैं,
उनके चेहरों पर खुशियों के 'फूल' खिलते हैं।
और जो सफर की शुरुवात "सिमरण" से करते हैं,
वो सतगुरु के पावन "चरणों" में रहते हैं। .
प्यार के पल जाे हमे सतगुरु से मिले उसका एहसास ही काफी है .
बाकी जिदंगी शुकराने मे निकल जाए .यही अरदास ही काफी है
सारे जगत को देने वाले
मैं क्या तुझको भेंट चढ़ाऊँ !
जिसके नाम से आए खुशबू
मै क्या उसको फूल चढ़ाऊँ !!.
वो तैरते तैरते डूब गये,
जिन्हे खुद पर गुमान था !
और वो डूबते डूबते भी तर गये..
जिन पर तू मेहरबान था !!
*पाँच तत्व का कोड है भगवान*
*जिससे यह ब्रह्माण्ड बना*
*भ + ग + व + आ + न*
*भूमि (धरती), गगन (आकाश),*
*वायु (हवा), अग्नि (आग),*
*नीर (पानी)*
*क्या अब भी कोई है*
*जिसने भगवान को देखा*
*अथवा जाना नही..?*
*अब अपने अन्दर झांक कर देखो*
*भगवान नज़र भी आएगा*
*और महसूस भी होगा*
आज के दिन एक माँ ने जन्मा था ऐसा लाल ,
वर्षों तक प्यासी रूहों को जिसने किया निहाल /
बंदे का रूप लेकर अवतार आया था
जग का बन कर हरदेव पालनहार आया था।
बांटा है वो उजाला जो कम कभी ना होगा ,
ऐसा भण्डार खोला,खत्म कभी ना होगा /
मोहनी सी सूरत थी ,मुस्कान थी गजब की ,
इंसान की शक्ल में समाई थी सूरत रब की /
चाबी खुदा के घर की ,हाथों में लेकर आया ,
भटकी हुई रूहों को है रास्ता दिखाया /
दिल लाया माँ के जैसा ,राजमाता का दुलारा ,
तभी तो संतो इसको कहते थे बख्शनहारा /
संसार के भले का बीड़ा था वो उठाया ,
हर पल जुटा था वो तो ,दिन रात सब भुलाया /
ना चैन की फ़िक्र थी ना नींद ही थी प्यारी ,
संसार के भले की छाई थी बस खुमारी /
बस एक नजर इसकी सुखों का थी खजाना ,
सदियों तलक रहेगा दीवाना इसका ज़माना /
साकार रूप में भी निरंकार रूप में भी ,
कण कण में बसने वाला है छाँव धुप में भी /
तीनो जहां का मालिक ,बरह्मज्ञान का सौदागर ,
रब से करादे बातें रब सामने दिखा कर /
जीवन की राह असल में दिखाई तो आपने हआज के दिन एक माँ ने जन्मा था ऐसा लाल ,
वर्षों तक प्यासी रूहों को जिसने किया निहाल /
बंदे का रूप लेकर अवतार आया था
जग का बन कर हरदेव पालनहार आया था।
बांटा है वो उजाला जो कम कभी ना होगा ,
ऐसा भण्डार खोला,खत्म कभी ना होगा /
मोहनी सी सूरत थी ,मुस्कान थी गजब की ,
इंसान की शक्ल में समाई थी सूरत रब की /
चाबी खुदा के घर की ,हाथों में लेकर आया ,
भटकी हुई रूहों को है रास्ता दिखाया /
दिल लाया माँ के जैसा ,राजमाता का दुलारा ,
तभी तो संतो इसको कहते थे बख्शनहारा /
संसार के भले का बीड़ा था वो उठाया ,
हर पल जुटा था वो तो ,दिन रात सब भुलाया /
ना चैन की फ़िक्र थी ना नींद ही थी प्यारी ,
संसार के भले की छाई थी बस खुमारी /
बस एक नजर इसकी सुखों का थी खजाना ,
सदियों तलक रहेगा दीवाना इसका ज़माना /
साकार रूप में भी निरंकार रूप में भी ,
कण कण में बसने वाला है छाँव धुप में भी /
तीनो जहां का मालिक ,बरह्मज्ञान का सौदागर ,
रब से करादे बातें रब सामने दिखा कर /
जीवन की राह असल में दिखाई तो आपने है ,
तू कल भी साथ में था तू आज भी साथ में है।....
इक मसीहा अमन चैन का पैगाम दे गया,
नमीं ऑंखो को और लबों को मुस्कान दे गया |
आओ मिल कर संभाले पत्ता पत्ता, डाली डाली,
बेजोड़ बागबां ये गुलिस्तां दे गया |
कहीं एकता की राहें ढूंढ पाना न हो मुमकिन,
इसलिए वो अपने कदमों के निशान दे गया |
एक एहसान और कर दिया जाते जाते ,
इस माँ के रूप में वो भगवान दे गया |
कुरबान जाऊँ तेरी रहमत पर, एहसान किया और जतलाया नहीं
बिना माँगें इतना दिया , दामन मेँ मेरे , समाया नहीं
जितना दिया सतगुरू ने मुझको , उतनी तो मेरी औकात नहीं
यह तो करम है उनका , वरना मुझ मेँ तो ऐसी बात नहीं ।
प्रेम का पाठ नम्रता से शुरु होता है और दया की डिग्री लेकर क्षमा पे समाप्त होता है। प्यार करने वाले हमेशा झुकना पसंद करते हैं। जो अहंकार में डूबे हैं प्रेम कभी नहीं कर सकते।
A Teacher instructs you, a Guru constructs you. A Teacher sharpens your mind, a Guru opens your mind. A Teacher answers your question, a Gur...