Har dil ko khushi se bharpur kar dena,Bas itni si rehmat Hujur kar dena,Mai har roz bhul jata hu sabak tera,meri har kami ko baba ji dur kar dena.
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30 September, 2011
29 September, 2011
28 September, 2011
जीव तीन रूपों में होता है -
१. एक शरीर में रहने वाला (एक राम दशरथ का बेटा)
२. सब शरीरो में रहने वाला (एक राम घट-घट में लेटा)
३. संसार का निर्माता जीव (एक राम का सकल पसारा)
ब्रह्म (निरंकार) सर्वव्यापी होने के कारण इस तीनो प्रकार के जीवो में भी है और इन सबसे अलग भी है (एक राम इन सब से न्यारा) | कहा भी है -
दसवाँ ब्रह्म अगोचर न्यारा सबके बीच समाया है | (अवतारवाणी, १०)
ऊपर बताये गए जीव के तीन रूपों में जो तीसरा रूप संसार का निर्माता कहा गया है, यह भी निराकार है, किन्तु सगुण निराकार है | ब्रह्म की भाँति निर्गुण निराकार नहीं | नौ द्वारो में इसे ही शामिल किया जाता है | "वायु जीव अकास विचाले" (अवतारवाणी, १०) कहने का भाव यही है कि शरीर के बाहर भी जीव (Principal Of Life) है | यह जीव सगुण निराकार है | इसमें सैट राज तम नामक तीनों गुण संसार बनाने में और शरीरो को धारण करने में सहायक होते हैं |
देहधारी जीव अगर अपना लक्ष्य माया (तन-मन-धन) को ही बनाये रहता है, तो जन्म-मरण के चौरासी-चक्र में घूमता रहता है और यदि अपना लक्ष्य परमात्मा-प्राप्ति को बनता है तो सतगुरु के शरणागत होकर मुक्ति प्राप्त कर लेता है |
- nirankari radio
१. एक शरीर में रहने वाला (एक राम दशरथ का बेटा)
२. सब शरीरो में रहने वाला (एक राम घट-घट में लेटा)
३. संसार का निर्माता जीव (एक राम का सकल पसारा)
ब्रह्म (निरंकार) सर्वव्यापी होने के कारण इस तीनो प्रकार के जीवो में भी है और इन सबसे अलग भी है (एक राम इन सब से न्यारा) | कहा भी है -
दसवाँ ब्रह्म अगोचर न्यारा सबके बीच समाया है | (अवतारवाणी, १०)
ऊपर बताये गए जीव के तीन रूपों में जो तीसरा रूप संसार का निर्माता कहा गया है, यह भी निराकार है, किन्तु सगुण निराकार है | ब्रह्म की भाँति निर्गुण निराकार नहीं | नौ द्वारो में इसे ही शामिल किया जाता है | "वायु जीव अकास विचाले" (अवतारवाणी, १०) कहने का भाव यही है कि शरीर के बाहर भी जीव (Principal Of Life) है | यह जीव सगुण निराकार है | इसमें सैट राज तम नामक तीनों गुण संसार बनाने में और शरीरो को धारण करने में सहायक होते हैं |
देहधारी जीव अगर अपना लक्ष्य माया (तन-मन-धन) को ही बनाये रहता है, तो जन्म-मरण के चौरासी-चक्र में घूमता रहता है और यदि अपना लक्ष्य परमात्मा-प्राप्ति को बनता है तो सतगुरु के शरणागत होकर मुक्ति प्राप्त कर लेता है |
- nirankari radio
Teacher vs Guru
A Teacher instructs you, a Guru constructs you. A Teacher sharpens your mind, a Guru opens your mind. A Teacher answers your question, a Gur...
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Fikar kare wo BAWARE, Jikar kare wo SADH, Uth farida Jikar kar, Teri FIKAR KAREGA ye AAP.
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Sabar shanti te samdrishti sant jana da gehna hai ! sant jana da vadda jevar bhane andar rehna hai !! _AVTAR VANI-28
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Hamesha apni chhoti chhoti galtiyo se bachne ki koshish karo, Q ki Insaan pahado se nahi chhote-chhote pathron se thokar khata hai.