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31 January, 2017

रहमत

कुरबान जाऊँ तेरी रहमत पर, एहसान किया और जतलाया नहीं
बिना माँगें इतना दिया , दामन मेँ मेरे , समाया नहीं
जितना दिया सतगुरू ने मुझको , उतनी तो मेरी औकात नहीं
यह तो करम है उनका , वरना मुझ मेँ तो ऐसी बात नहीं ।

प्रेम का पाठ

प्रेम का पाठ नम्रता से शुरु होता है और दया की डिग्री लेकर क्षमा पे समाप्त होता है। प्यार करने वाले हमेशा झुकना पसंद करते हैं। जो अहंकार में डूबे हैं प्रेम कभी नहीं कर सकते।

Teacher vs Guru

A Teacher instructs you, a Guru constructs you. A Teacher sharpens your mind, a Guru opens your mind. A Teacher answers your question, a Gur...