ऐ सतगुरू मेरे...
नज़रों को कुछ ऐसी खुदाई दे...
जिधर देखूँ उधर तू ही दिखाई दे...
कर दे ऐसी कृपा आज इस दास पे कि...
जब भी बैठूँ सिमरन में...
तेरी हर रेहमतो के सहारे हे जिन्दगी मेरी...
मेरी हर साँस मे हो इबादत तेरी...
कर क्रिपा तू ऐ दातार 
तेरे शब्दो पे निसार हो ज़िन्दगानी  मेरी...
छोटा बनके रहोगें तो, मिलेगी हर बड़ी रहमत दोस्तों
बड़ा होने पर तो माँ भी, गोद से उतार देती है……..!!
जिंदगी में बडी शिद्दत से निभाओ अपना किरदार,
कि परदा गिरने के बाद भी तालीयाँ बजती रहे……!!!

क्या बताएं यारो

क्या बताएं यारो कैसा ये खुदा  लगता है
जिस्म से रूह तक ये ही बसा लगता है।
जिनको मालूम नही उनके लिए कुछ न  हो बेशक
जिनको मालूम है उनको हर शख्स खुदा लगता है।
"उपवास करून जर
देव खूश होत असेल
तर या जगात कित्येक
दिवस उपाशी पोटी
असणारा भिखारी हा
सर्वात जास्त सुखी राहिला
असता."
कोई सानी नही तेरी रेहमतो के सागर का,

तूने एतबार दिया इंसान पर इंसान का,

धूल के कण भी न थे हम तेरी दुनिया के,

माथे का चंदन बना दिया इस संसार का,

कोई सजदा नही, 

तेरी याद का कोई फेरा नही,

फिर भी साॅसे चल रही है, 

ये भरोसा है बस तेरे प्यार का...

बस तेरे प्यार का...

मानव मन की अवस्था

मानव मन की अवस्था : 

रात के अँधेरे से डरते हें
निरंकार से क्यू नही..?
सपनो से डरते हें
सतगुरु से क्यू नही..?
बिच्छु से डरते हें
गुनाहों से क्यू नही..?
स्वर्ग में जाना चाहते हें
सत्संग में क्यू नही..?
रिश्वत देते हें
सेवा क्यू नही..?
मनमत पर चलते हें
गुरुमत पर क्यू नही..?
गाने गाते हें
सिमरन क्यू नही..?
सत्संग सुनते हें
अमल करते क्यू नही..?
Pal pal tarse the us pal ke liye ,
pal aaya bhi toh kuch pal ke liye ...
Socha tha us pal ko khubsoorat pal banaye ge 
par woh pal ruka bhi toh kuch pal ke liye..(Missing Samagam Days)

सतगुरु प्यारे

सतगुरु प्यारे इन्होने 
इतना बचाया हैं
हसने लगी ज़िन्दगी,
मन मुस्कुराया हैं
दिव्यदृष्टि देकर के,
अँधेरा मिटाया हैं
नज़रे नूरानी से,
स्वरुप दिखाया हैं
गिर गए थे हम तो,
गुरु ने उठाया हैं
अवगुण नहीं देखे,
गले से लगाया हैं
अनमोल खज़ाना देकर,
बादशाह बनाया हैं
विषयों के कीचड़ में,
गिरने से बचाया हैं
मुरझाया मन का चमन,
गुरु ने खिलाया हैं
भूल गए थे हसना,
गुरु ने हसाया हैं
संसार सागर से,
गुरु ने ताराया हैं
मन पर जन्मो से,
गफलत का पर्दा था
दुई का पर्दा हटा कर,
नींद से जगाया हैं
कैसे भूलूँ रहमत,
तन मन चमकाया है।।।।।।
तेरे संत है ये फरिशतों से कम
नही रहबर
इनमे रहने का सलीका सिखा दे
मुझको।                                
है छोटी सी ज़िन्दगी, तकरारें किस लिए...
रहो एक दूसरे के दिलों में यह दीवारें किस लिए ।