तेरे सिमरन में बीते जिंदगी

तेरा शुक्र कर के गुजरे हर श्वास,

ध्यान रखना मेरे सतगुरु

और देना भक्ति में अटूट विश्वास.
हक़ीक़त रूबरू हो तो अदाकारी नही चलती,,
ख़ुदा के सामने बन्दों की मक्कारी नही चलती,,
तुम्हारा दबदबा तो ख़ाली तुम्हारी ज़िंदगी तक है,,
किसी की क़ब्र के अन्दर ज़मींदारी नही चलती...

 बुलंदी मिल नही सकती उन्हे जो फक्र करते है,


 बुलंदी है उसीकी जो खुदा का शुक्र करते है।
"खुद"में "खुदा को" देखना  "ध्यान" है
 "दूसरों" में "खुदा को" देखना"प्रेम" है
खुदा को सबमें और सबमें  खुदा को देखना ज्ञान है.
Kabhi Rukna Nahi Himmat Haar Ke
Sapne Dekho Sada Bahar Ke
Har Khushi Ayegi Daman Me Apke
Bas vishwas Rakho is NIRANKAR Pe.
शहंशाही नही,
मुझे इन्सानियत अदा कर रब..
मै लोगो पे नही,
दिलो पे राज करना चाहता हूं...
कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है;

कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है;

कब तक छुपाऊँ दिल की बात बाबा जी;

आपकी हर अदा पर मुझे प्यार आ जाता है। —
कितनी सरल परिभाषा है
 मैं और तू की
     मैं इक शबद् तू इक अरथ्
तू बिन मैं वयरथ्
   "बस जीवन में इस तू के महत्व को समझ पाए"
बेहतरीन इंसान अपनी मीठी जुबान से ही जाना जाता है,,,, वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती है...!

क्या बताएं यारो कैसा ये खुदा लगता है जिस्म से रूह तक ये ही बसा लगता है। जिनको मालूम नही उनके लिए कुछ न हो बेशक जिनको मालूम है उनको हर शख्स खुदा लगता है।

खर्च

प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा। विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी। साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा। किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं । मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती एक साँस भी तब आती है जब एक साँस छोड़ी जाती हे
कोई सानी नही तेरी रेहमतो के सागर का, तूने एतबार दिया इंसान पर इंसान का, धूल के कण भी न थे हम तेरी दुनिया के, माथे का चंदन बना दिया इस संसार का, कोई सजदा नही, तेरी याद का कोई फेरा नही, फिर भी साॅसे चल रही है, ये भरोसा है बस तेरे प्यार का... बस तेरे प्यार का...
छोटा बनके रहोगें तो, मिलेगी हर बड़ी रहमत दोस्तों बड़ा होने पर तो माँ भी, गोद से उतार देती है……..!! जिंदगी में बडी शिद्दत से निभाओ अपना किरदार, कि परदा गिरने के बाद भी तालीयाँ बजती रहे……!!!
जब बचपन था, तो जवानी एक ड्रीम था... जब जवान हुए, तो बचपन एक ज़माना था... !! जब घर में रहते थे, आज़ादी अच्छी लगती थी... आज आज़ादी है, फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है... !! कभी होटल में जाना पिज़्ज़ा, बर्गर खाना पसंद था... आज घर पर आना और माँ के हाथ का खाना पसंद है... !!! स्कूल में जिनके साथ ज़गड़ते थे, आज उनको ही इंटरनेट पे तलाशते है... !! ख़ुशी किसमे होतीं है, ये पता अब चला है... बचपन क्या था, इसका एहसास अब हुआ है... काश बदल सकते हम ज़िंदगी के कुछ साल.. .काश जी सकते हम, ज़िंदगी फिर एक बार...!!
ऐ सतगुरू मेरे...
नज़रों को कुछ ऐसी खुदाई दे...
जिधर देखूँ उधर तू ही दिखाई दे...
कर दे ऐसी कृपा आज इस दास पे कि...
जब भी बैठूँ सिमरन में...